अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड से जुड़े संभावित नए टैरिफ (शुल्क) खतरे के बीच यूके और जर्मनी उन विकसित अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं, जो सबसे अधिक प्रभावित हो सकती हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि इन दोनों देशों के कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार में जाता है। मनीकंट्रोल के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी बाजार पर अधिक निर्भरता इन्हें किसी भी अचानक व्यापारिक झटके के प्रति संवेदनशील बनाती है। इसके विपरीत, नॉर्डिक देशों ने पिछले दो दशकों में धीरे-धीरे अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम की है। इस कारण वे किसी अचानक लगने वाले टैरिफ या व्यापारिक झटके का सामना करने की बेहतर स्थिति में हैं। साल 2024 में अमेरिका, यूके के कुल निर्यात का 14.1 प्रतिशत और जर्मनी के निर्यात का 10.4 प्रतिशत हिस्सा रहा — जो यूरोप में सबसे अधिक एक्सपोजर स्तरों में से एक है। यह संवेदनशीलता समय के साथ कम नहीं हुई है, बल्कि लगातार बनी हुई है। 2000 के शुरुआती वर्षों में भी ब्रिटेन के लगभग 15–16 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को जाते थे, जबकि जर्मनी का यह आंकड़ा करीब 10 प्रतिशत था। दो दशकों बाद भी व्यापार पैटर्न में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। नतीजतन, दोनों अर्थव्यवस्थाएं वॉशिंगटन की ओर से किसी भी टैरिफ से जुड़े कदम के प्रति आज भी उतनी ही संवेदनशील बनी हुई हैं।