राजधानी दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक बहुत बड़ा मेडिकल घोटाला सामने आया है। दिल्ली सरकार की एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) की पूर्व प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई दवाओं और मेडिकल उपकरणों की सरकारी खरीद में हुए लगभग 700 करोड़ रुपये के घोटाले के सिलसिले में की गई है। कैसे दिया गया घोटाले को अंजाम? जांच एजेंसियों के मुताबिक, सरकारी खजाने को चूना लगाने का यह पूरा खेल सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के माध्यम से खेला गया। घोटालेबाजों ने एक सुनियोजित तरीके से उपकरणों की वास्तविक कीमत को कई गुना बढ़ाकर दिखाया। इस धांधली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाजार में लगभग 10 लाख रुपये में मिलने वाली पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का बिल 33 लाख रुपये का पास किया गया। इस पूरे खेल में टेंडर प्रक्रिया के नियमों को भी पूरी तरह से ताक पर रखकर हेरफेर की गई। आरोप है कि अधिकारियों ने अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी सप्लायर्स और कागजी कंपनियों को सरकारी ठेके बांट दिए। इन्हीं फर्जी कंपनियों के जरिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये बड़ी आसानी से निकाल लिए गए। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस लूट में अस्पताल के छोटे-मोटे सामानों को भी नहीं बख्शा गया। जीवनरक्षक ओआरएस (ORS) के पैकेट और अस्पतालों में बिछाई जाने वाली चादरों (Linen) तक की खरीद में बाजार भाव से 200% से 500% तक ज्यादा दाम का भुगतान किया गया। ED की एंट्री और अब तक की कार्रवाई डॉ. वत्सला अग्रवाल की गिरफ्तारी इस मामले की पहली कड़ी नहीं है। इससे पहले ACB द्वारा CPA के पूर्व कार्यालय प्रमुख और पूर्व उप लेखा नियंत्रक (Deputy Controller of Accounts) को भी सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इस भारी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार की गंभीरता को देखते हुए अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है। ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अपनी जांच शुरू कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई अन्य अधिकारियों पर भी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। मरीजों की जान बचाने के लिए खरीदे जाने वाले उपकरणों में हुआ यह घोटाला सरकारी ऑडिट और मॉनिटरिंग सिस्टम की बड़ी नाकामी उजागर करता है। जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने में जुटी हैं कि घोटाले की रकम किन-किन लोगों तक पहुंची और क्या इस सिंडिकेट में कोई और बड़े चेहरे भी शामिल हैं।