देश में परीक्षा प्रणाली में सुधार और नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। 28 जून से शुरू हुए इस अनशन को आज 18 दिन हो चुके हैं, और डॉक्टरों के मुताबिक उनकी शारीरिक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। तेजी से गिर रहा है वजन, मांसपेशियां हुईं कमजोर मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 18-19 दिनों के कड़े अनशन के कारण सोनम वांगचुक का वजन लगभग 8 किलोग्राम तक कम हो चुका है। उनका ब्लड प्रेशर लगातार सामान्य से नीचे बना हुआ है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक अन्न न लेने की वजह से उनके शरीर में गंभीर ‘मसल लॉस’ (मांसपेशियों का नुकसान) हो रहा है और वे अत्यधिक शारीरिक दर्द से गुजर रहे हैं। जंतर-मंतर पर डॉक्टरों की एक विशेष टीम चौबीसों घंटे उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर निगरानी रख रही है। मांगों पर अड़े वांगचुक, संवाद की अपील तबीयत गंभीर रूप से खराब होने के बावजूद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार इस राष्ट्रीय मुद्दे पर आगे आकर ठोस बातचीत शुरू नहीं करती, वे पीछे नहीं हटेंगे। उनकी मुख्य मांग देश की परीक्षा व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता लाना, पेपर लीक की जवाबदेही तय करना और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कड़े कदम उठाना है। कोर्ट तक पहुंचा मामला और बढ़ता जनसमर्थन वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका भी दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि उनकी जान बचाने के लिए उन्हें तुरंत किसी सरकारी अस्पताल में शिफ्ट किया जाए और चिकित्सकीय देखरेख में जरूरी लिक्विड डाइट दी जाए। इस बीच, विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रमुख हस्तियों ने जंतर-मंतर पहुंचकर उनके प्रति एकजुटता दिखाई है। कई लोगों ने उनसे अनशन खत्म करने की भावुक अपील की है, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। सोनम वांगचुक और अनशन पर बैठे छात्रों के समर्थन में 16 जुलाई को एक बड़े स्तर पर एक दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल का आह्वान किया गया है। इसके साथ ही, आगामी 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन एक बड़े ‘संसद मार्च’ की रूपरेखा तैयार की गई है, ताकि इस गंभीर विषय को सीधे संसद के भीतर और बाहर पुरजोर तरीके से उठाया जा सके। Post navigation भारतीय वायुसेना का डंका, चीन को पछाड़कर बनी दुनिया की तीसरी बड़ी हवाई ताकत भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट सफल: जानें अब अंतरिक्ष में क्या है स्टेटस?