संसद का मानसून सत्र गुरुवार, 13 अगस्त को लगातार हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। यह सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और 25 दिनों तक चला, जिसमें कुल 19 बैठकें हुईं। इस दौरान कई अहम विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित करने की प्रक्रिया भी पूरी की गई।

12 विधेयक दोनों सदनों से पास

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों ने कुल 12 विधेयकों को मंजूरी दी। इनमें पब्लिक एग्जामिनेशन से जुड़े नियमों में संशोधन, MSME से जुड़ा संशोधन और Mines and Minerals Amendment Bill समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक शामिल रहे। इन विधेयकों के पास होने से शिक्षा, खनन और छोटे एवं मध्यम उद्योगों से जुड़े क्षेत्रों में नए प्रावधान लागू होने का रास्ता साफ हुआ।

हंगामे का रहा असर

हालांकि विधायी कामकाज हुआ, लेकिन पूरे सत्र में विपक्ष के विरोध और लगातार व्यवधान का असर सदन की कार्यवाही पर पड़ा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक, लोकसभा की उत्पादकता करीब 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही। सरकार और विपक्ष ने सदन की कार्यवाही बाधित होने के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया।

वंदे मातरम् से हुई आखिरी दिन की शुरुआत

सत्र के आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही ‘वंदे मातरम्’ के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेता सदन में मौजूद रहे। कार्यवाही के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष की ओर से हंगामा और नारेबाजी भी देखने को मिली। इसके बाद सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

JPC को भेजा गया अहम बिल

सत्र के दौरान Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को आगे की जांच और समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया। समिति बिल के प्रावधानों की विस्तृत जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करेगी।

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