संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया। बिल का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धांधली पर और सख्त कार्रवाई करना है। हालांकि, विधेयक पेश होते ही विपक्ष ने सदन में जोरदार हंगामा किया, जिसके चलते कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष ने क्या कहा? विपक्षी दलों ने कानून की जरूरत पर सीधे आपत्ति नहीं जताई, बल्कि उनका कहना था कि सरकार को पहले हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही पर सदन में चर्चा करानी चाहिए। विपक्ष ने मांग की कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब दे, उसके बाद ही विधेयक पर विस्तृत बहस हो। बिल में क्या हैं प्रमुख प्रावधान? सरकार के अनुसार संशोधन विधेयक का उद्देश्य पेपर लीक के मामलों में तेजी से कार्रवाई और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित प्रावधानों में हर राज्य में फास्ट-ट्रैक कोर्ट, तय समय सीमा में जांच पूरी करना, जांच एजेंसियों को अधिक अधिकार और दोषियों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान शामिल है। सरकार का कहना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों का विश्वास मजबूत होगा। बहस टली, राजनीतिक टकराव जारी सदन में लगातार हंगामे के कारण विधेयक पर विस्तृत चर्चा तय समय पर नहीं हो सकी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से बहस में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण कानून को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल नया कानून लाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सरकार को परीक्षा प्रणाली में हुई चूकों और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर भी जवाब देना चाहिए। एंटी पेपर लीक बिल को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। सरकार इसे परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष जवाबदेही और छात्र हितों को प्राथमिकता देने की मांग कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगामी चर्चा में विधेयक पर क्या फैसला होता है और संसद में इस पर किस तरह की सहमति बनती है। Post navigation सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CJP का विरोध, सौरव दास ने आंदोलन की चेतावनी बांकीपुर में बीजेपी को बड़ा झटका, प्रशांत किशोर ने जीता उपचुनाव