राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रताप नगर इलाके में 3 जुलाई को हुए एक दर्दनाक ‘सड़क हादसे’ ने अब एक खौफनाक मर्डर मिस्ट्री का रूप ले लिया है। 45 वर्षीय नीरज शर्मा की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि 7 लाख रुपये की सुपारी देकर की गई एक सोची-समझी हत्या थी। इस पूरी साजिश की मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि उनकी अपनी 23 वर्षीय लॉ स्टूडेंट बेटी, आयुषी शर्मा निकली।

हादसे का नाटक और सीसीटीवी का सच

​3 जुलाई को नीरज शर्मा अपने दिव्यांग बेटे को कोचिंग से छोड़कर लौट रही थीं, तभी करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने उन्हें कुचल दिया। शुरुआत में पुलिस और परिवार ने इसे ‘हिट एंड रन’ का मामला माना। लेकिन सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की बारीकी जांच में हत्या की परतें खुलती चली गईं।

हत्या के दो मुख्य कारण

पुलिस जांच के अनुसार, बेटी आयुषी ने इतनी खौफनाक साजिश दो मुख्य कारणों से रची। पहला कारण अनुकंपा की नौकरी थी। 2025 में आयुषी के पिता विजय कुमार शर्मा के निधन के बाद, उनकी माँ नीरज को कोर्ट में लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) की नौकरी अनुकंपा के आधार पर मिली थी जिसे आयुषी खुद पाना चाहती थी। इसके अलावा दूसरा कारण प्रॉपर्टी विवाद था। परिवार में संपत्ति को लेकर भी तनाव चल रहा था और आयुषी को लगता था कि उसकी माँ उसे संपत्ति से बेदखल कर सकती है क्योंकि वे अपने बेटे को ज्यादा महत्व देती थीं।

महीने भर की रेकी और 7 लाख की सुपारी

इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के लिए आयुषी ने अपने ताऊ मोहन स्वरूप और चचेरे भाई बलराम के साथ मिलकर साजिश रची। इस मर्डर को एक हादसे का रूप देने के लिए किराए के हत्यारों को 7 लाख रुपये की सुपारी दी गई। हत्यारों ने लगभग एक महीने तक नीरज शर्मा की रेकी की और उनके आने-जाने के समय पर नज़र रखी। वारदात के दिन नीरज की लाइव लोकेशन ट्रैक की गई, जिसके ठीक बाद स्कॉर्पियो सवार हत्यारों ने उन्हें कुचल दिया।

पुलिस की कार्रवाई और नया मोड़

मृतका के भाई राकेश कुमार शर्मा द्वारा हत्या की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस एक्शन में आई। पुलिस ने अब तक मुख्य आरोपी बेटी आयुषी शर्मा, ताऊ मोहन स्वरूप और रेकी व हत्या में शामिल 5 अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मामले का एक मुख्य साजिशकर्ता चचेरा भाई बलराम अभी फरार है। इस बीच मामले में एक और सनसनीखेज आरोप लगा है। मृतका के भाई ने नई शिकायत दी है कि 2025 में आयुषी के पिता विजय शर्मा की मौत भी संदिग्ध थी। आरोप है कि ब्रेन हैमरेज के बाद आयुषी और बलराम ने इलाज से जुड़ी जानकारी छिपाई और उन्हें सही समय पर इलाज नहीं दिया, ताकि संपत्ति पर कब्ज़ा किया जा सके। पुलिस अब इस नए एंगल से भी जांच कर रही है।

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