शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और हाल के NEET परीक्षा विवादों को लेकर मंगलवार को राजधानी दिल्ली में हजारों छात्र और युवा ‘चलो संसद’ मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह झड़प हुई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। सरकारी अस्पतालों के अनुसार, इस घटनाक्रम में 170 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी दोनों शामिल हैं।

क्यों हुआ प्रदर्शन?

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और हालिया पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच थी। इसके अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा रही। बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न संगठनों के सदस्य जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च के लिए निकले।

संसद के बाहर क्या हुआ?

प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग की ओर बढ़ने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कई स्तर की बैरिकेडिंग की थी। जैसे ही भीड़ आगे बढ़ी, कुछ स्थानों पर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े। कुछ जगहों पर पथराव की घटनाएं भी सामने आईं, जिसके बाद सुरक्षा और कड़ी कर दी गई।

संसद के अंदर क्या हुआ?

मानसून सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा विवाद और प्रदर्शन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्षी सांसदों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और छात्रों की मांगों पर चर्चा की मांग की। सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों का बचाव किया गया और कहा गया कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है।

मेट्रो और ट्रैफिक पर पड़ा असर

प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा कारणों से केंद्रीय दिल्ली के पांच प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद किया गया। कई यात्रियों को स्टेशनों के बाहर इंतजार करना पड़ा, जबकि कुछ स्थानों पर भारी भीड़ के कारण अफरा-तफरी का माहौल बन गया। संसद मार्ग, जनपथ, इंडिया गेट, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में लंबे ट्रैफिक जाम की स्थिति भी देखने को मिली

170 से अधिक लोग घायल

सरकारी अस्पतालों में भर्ती आंकड़ों के अनुसार, 170 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इनमें प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी दोनों शामिल हैं। कई लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ का इलाज अभी भी जारी है। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया है।

फिलहाल क्या है स्थिति?

शाम तक संसद परिसर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। कई मार्गों पर बैरिकेडिंग जारी है और सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं, जबकि प्रदर्शनकारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।

दिल्ली का यह प्रदर्शन केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की बढ़ती चिंताओं का भी संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच बातचीत तथा शिक्षा सुधार को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर रहेगी।

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