स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहनावे में नजर आए तिरंगे के रंगों वाले पॉकेट स्क्वायर को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने पॉकेट स्क्वायर में दिखाई दे रहे रंगों के क्रम पर सवाल उठाते हुए इसे आयरलैंड के झंडे से जोड़कर प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। वहीं, इस पूरे विवाद के बीच सामाजिक माध्यमों पर लोग ध्वज संहिता के नियमों का हवाला देते हुए अलग-अलग दावे कर रहे हैं।

क्या है पूरा विवाद?

15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के दौरान उनके जैकेट पर तिरंगे से मिलते-जुलते रंगों वाला पॉकेट स्क्वायर दिखाई दिया। तस्वीरों में हरा, सफेद और केसरिया रंग नजर आने के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाया कि रंगों का क्रम भारतीय तिरंगे के बजाय आयरलैंड के झंडे जैसा दिखाई दे रहा है।

कांग्रेस की ओर से इसे लेकर राजनीतिक तंज भी किया गया। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री भारत का स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं या आयरलैंड का। इसी के बाद पॉकेट स्क्वायर सामाजिक माध्यमों और राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

लेकिन ध्वज संहिता में लंबवत तिरंगे का नियम क्या है?

यहीं पर इस विवाद को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है। भारतीय ध्वज संहिता में लंबवत यानी खड़े रूप में राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित करने के लिए अलग दिशा बताई गई है।

नियम के अनुसार, जब झंडा लंबवत रूप में प्रदर्शित किया जाता है, तो झंडे के संदर्भ से केसरिया पट्टी दाईं ओर होनी चाहिए। नियम साथ ही यह स्पष्ट करता है कि इसका अर्थ है कि झंडे के सामने खड़े व्यक्ति को केसरिया पट्टी बाईं ओर दिखाई देगी।

यानी सामने से देखने पर लंबवत तिरंगे का क्रम होगा:

केसरिया | सफेद | हरा

गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर भारतीय ध्वज संहिता, 2002 और उससे जुड़े नियम उपलब्ध हैं।

फिर पॉकेट स्क्वायर को गलत क्यों कहा जा रहा है?

विवाद का बड़ा कारण यह है कि पॉकेट स्क्वायर को तस्वीर में किस दिशा से देखा जाए। आलोचकों का कहना है कि इसमें हरा-सफेद-केसरिया क्रम दिखाई देता है, इसलिए यह भारतीय तिरंगे के सामान्य क्षैतिज क्रम से अलग लगता है।

वहीं, दूसरी तरफ यह तर्क दिया जा रहा है कि पॉकेट स्क्वायर कोई सपाट राष्ट्रीय ध्वज नहीं था। यह कपड़े का एक हिस्सा था, जो जेब में मोड़ा हुआ था और अलग कोण से दिखाई दे रहा था। इसलिए उसके रंगों को सीधे राष्ट्रीय ध्वज की तरह समझना उचित नहीं होगा।

क्या पॉकेट स्क्वायर पर ध्वज संहिता लागू होती है?

यह इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। ध्वज संहिता मुख्य रूप से भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन और उसके सम्मान से जुड़े नियमों को निर्धारित करती है। प्रधानमंत्री का पॉकेट स्क्वायर स्वयं राष्ट्रीय ध्वज नहीं था, बल्कि तिरंगे के रंगों से प्रेरित पहनावे का एक हिस्सा था।

इसलिए केवल रंगों का क्रम देखकर यह कहना कि प्रधानमंत्री ने निश्चित रूप से ध्वज संहिता का उल्लंघन किया, एक मजबूत कानूनी निष्कर्ष होगा, जिसके लिए स्पष्ट आधिकारिक आधार जरूरी है।

तो आखिर निष्कर्ष क्या है?

इस विवाद में दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है। पहली, लंबवत रूप में राष्ट्रीय ध्वज के लिए ध्वज संहिता के अनुसार सामने से देखने पर केसरिया बाईं ओर, सफेद बीच में और हरा दाईं ओर दिखाई देता है। दूसरी, प्रधानमंत्री मोदी का पॉकेट स्क्वायर स्वयं राष्ट्रीय ध्वज नहीं था।

इसलिए पॉकेट स्क्वायर के रंगों की व्यवस्था पर राजनीतिक बहस हो सकती है और यह सवाल भी उठाया जा सकता है कि इसे तिरंगे की तरह प्रस्तुत किया गया या नहीं। लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे सीधे “तिरंगे का अपमान” या “ध्वज संहिता का स्पष्ट उल्लंघन” कहना उचित नहीं होगा।

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