महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। शिवसेना (UBT) के छह बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर दावा किया कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है और भविष्य में उसका कांग्रेस में विलय हो सकता है। इसी आशंका को उन्होंने पार्टी छोड़ने का प्रमुख कारण बताया। इन सांसदों के कदम ने न केवल उद्धव ठाकरे खेमे के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है, बल्कि महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। Lok Sabha Speaker से क्या बोले बागी सांसद? सूत्रों के अनुसार, छह बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को दिए पत्र में कहा कि शिवसेना (UBT) अपनी पारंपरिक हिंदुत्ववादी पहचान से दूर जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व कांग्रेस के साथ इतना करीब आ गया है कि भविष्य में पार्टी के कांग्रेस में विलय की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से उन्होंने अलग समूह बनाने का फैसला लिया। किन सांसदों ने किया विद्रोह? रिपोर्ट्स के मुताबिक बागी सांसदों में शामिल हैं: ओमराजे निंबालकर संजय देशमुख संजय जाधव संजय दीना पाटिल नागेश पाटिल अष्टीकर भाऊसाहेब वाकचौरे इन सांसदों ने लोकसभा में अलग समूह के तौर पर मान्यता की मांग की है और बाद में एकनाथ शिंदे गुट के साथ जाने की संभावना भी जताई जा रही है। उद्धव ठाकरे गुट का पलटवार उधर, उद्धव ठाकरे खेमे ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह “ऑपरेशन टाइगर” का हिस्सा है और सांसदों पर दबाव डालकर उन्हें तोड़ा जा रहा है। शिवसेना (UBT) के नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर किसी भी बागी गुट को अलग मान्यता नहीं देने की अपील की है। महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या होगा असर? यदि छह सांसदों का यह कदम औपचारिक रूप लेता है, तो यह 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा झटका होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे विपक्षी INDIA गठबंधन की एकजुटता पर भी असर पड़ सकता है और महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस में विलय को लेकर अभी तक शिवसेना (UBT) या कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। Post navigation पश्चिम बंगाल: अब नगर निकायों पर BJP की नजर, पार्षदों के इस्तीफों से आसान हो रहा सियासी रास्ता; ये है पार्टी की नई रणनीति यूपी भाजपा की नई टीम पर घमासान, चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल