63 साल के एक्टर की शर्मनाक हरकत! महिलाओं को गंदे कॉल, मां के साथ बदतमीजी

बॉलीवुड के दमदार अभिनेता और लेखक पियूष मिश्रा ने हाल ही में अपने जीवन के एक बेहद मुश्किल दौर को लेकर खुलकर बात की है। एक पॉडकास्ट बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि वह एक समय शराब की लत में इस कदर डूब चुके थे कि उसका असर उनके व्यवहार, रिश्तों और करियर तक पर पड़ने लगा था।

‘शौक नहीं, जरूरत बन गई थी शराब’

पीयूष मिश्रा ने बताया कि शुरुआत में शराब केवल शौक थी, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी जरूरत बन गई। उन्होंने कहा कि शरीर खुद शराब की मांग करने लगता था और चाहकर भी उससे दूरी बनाना मुश्किल हो गया था। यह लत उनके मानसिक संतुलन और सोच पर भी हावी होने लगी थी।

निजी जिंदगी में आया तूफान

इस लत का सबसे ज्यादा असर उनकी पर्सनल लाइफ पर पड़ा। पीयूष मिश्रा ने स्वीकार किया कि नशे की हालत में उन्होंने कई बार ऐसा व्यवहार किया, जिससे उनके रिश्तों में तनाव और भावनात्मक उथल-पुथल पैदा हुई। उन्होंने कहा कि उस दौर में वह खुद को नियंत्रित नहीं कर पाते थे और बाद में उन्हें अपने व्यवहार पर पछतावा होता था।

‘महिलाओं को किए थे अश्लील कॉल’

एक्टर ने यह भी खुलासा किया कि शराब के नशे में उन्होंने कुछ महिलाओं को फोन कर आपत्तिजनक बातें की थीं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी मां के साथ भी बदतमीजी की और उन्हें भला-बुरा कहा। पीयूष ने माना कि उस समय वह मानसिक रूप से अस्थिर थे और कई बार उन्हें अगले दिन यह भी याद नहीं रहता था कि उन्होंने क्या कहा या किया।

करियर पर भी पड़ा असर

हालांकि पीयूष मिश्रा ने सेट पर कभी शराब नहीं पी, लेकिन उनकी इस आदत का असर उनकी पेशेवर छवि पर जरूर पड़ा। इंडस्ट्री में उन्हें एक मुश्किल इंसान के रूप में देखा जाने लगा था। उन्हें बार-बार यह साबित करना पड़ता था कि वह बदल चुके हैं, जो उनके लिए एक लंबी और थकाऊ प्रक्रिया रही।

2009 का ब्रेन स्ट्रोक बना टर्निंग प्वाइंट

पीयूष मिश्रा की जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव साल 2009 में आया, जब उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ। इस घटना ने उन्हें अपनी हालत की गंभीरता का एहसास कराया। इसके बाद उन्होंने खुद को सुधारने के लिए कदम उठाए और विपश्यना जैसी आध्यात्मिक साधनाओं का सहारा लिया, जिससे उन्हें अपनी लत पर काबू पाने में मदद मिली।

पीयूष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने शराब पूरी तरह नहीं छोड़ी है, लेकिन अब वह उस पर काफी हद तक नियंत्रण पा चुके हैं। उनका यह सफर इस बात का उदाहरण है कि सही समय पर लिया गया फैसला किसी भी इंसान की जिंदगी को बदल सकता है।

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