भारत सरकार ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री Dick Schoof की उस टिप्पणी को खारिज कर दिया है, जिसमें भारत में press freedom और minority rights को लेकर चिंता जताई गई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह बयान “lack of knowledge” यानी पर्याप्त जानकारी के अभाव को दर्शाता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जहां मीडिया पूरी स्वतंत्रता के साथ काम करता है और सभी समुदायों को संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं।

सरकार ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत हैं और देश में कानून के तहत सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जाती है।

यह विवाद उस समय सामने आया जब Dick Schoof ने एक कार्यक्रम के दौरान भारत में प्रेस स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर टिप्पणी की थी। उनके बयान के बाद भारत की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि दूसरे देशों को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों को सही तरीके से समझना चाहिए। बयान में यह भी कहा गया कि भारत की विविधता और लोकतांत्रिक ढांचे को दुनिया भर में मान्यता मिली हुई है।

भारत और नीदरलैंड के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, technology, water management और strategic cooperation के क्षेत्र में संबंध मजबूत हुए हैं। ऐसे में यह बयान दोनों देशों के diplomatic circles में चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि दोनों देशों की ओर से अब तक किसी बड़े कूटनीतिक तनाव के संकेत नहीं मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्ष आपसी संबंधों को सामान्य बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।

भारत पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और विदेशी नेताओं की ऐसी टिप्पणियों पर आपत्ति जता चुका है। सरकार का कहना रहा है कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाएं बाहरी प्रमाणपत्र की मोहताज नहीं हैं।

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