शिक्षा व्यवस्था में सुधार और हालिया पेपर लीक मामलों को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे प्रख्यात शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया है। अनशन के 21वें दिन में प्रवेश करते ही पुलिस ने एक सुनियोजित और गोपनीय ऑपरेशन के तहत उन्हें धरना स्थल से हटाया। इस पूरी कार्रवाई को लेकर अब प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई है। ऑपरेशन की इनसाइड स्टोरी: 3 बजे से शुरू हुई तैयारी जंतर-मंतर पर मौजूद चश्मदीदों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कोई सामान्य शिफ्टिंग नहीं थी। दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से गुप्त रखा था। रात करीब 3 बजे से ही भारी संख्या में पुलिस बल इकट्ठा होना शुरू हो गया था, जिसे शुरुआत में मानसून सत्र से पहले की एक ‘सिक्योरिटी ड्रिल’ बताया गया। लाइव स्ट्रीमिंग और किसी भी बाहरी संपर्क को रोकने के लिए इलाके में मोबाइल जैमर तक का इस्तेमाल किया गया। सुबह करीब 6:30 बजे, पुलिस ने तेज़ी से कार्रवाई करते हुए सबसे पहले मुख्य मंच को सफेद पर्दों से घेर दिया ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति या कैमरा अंदर की तस्वीर न ले सके। महज़ कुछ ही मिनटों के भीतर, वांगचुक को वहां पहले से तैयार एम्बुलेंस में शिफ्ट कर सफदरजंग अस्पताल के लिए रवाना कर दिया गया। जब समर्थकों ने मानव श्रृंखला बनाकर इस कार्रवाई का विरोध किया, तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। अस्पताल में मेडिकल गतिरोध सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, सोनम वांगचुक पूरी तरह से होश में हैं और उनके वाइटल्स (रक्तचाप और पल्स) फिलहाल स्थिर हैं। हालांकि, 20 दिनों से लगातार अन्न त्यागने के कारण उनके शरीर में गंभीर डिहाइड्रेशन और अत्यधिक कमज़ोरी आ गई है। अस्पताल में एक बड़ा मेडिकल गतिरोध तब पैदा हो गया, जब वांगचुक ने अपने संकल्प पर अडिग रहते हुए नसों के ज़रिए दिए जाने वाले तरल पदार्थ (IV fluids), ORS या किसी भी तरह की जीवनरक्षक दवाइयां लेने से साफ इनकार कर दिया। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सख्त सलाह पर की गई है, क्योंकि वांगचुक की जान को खतरा हो सकता था। परिजनों की आपत्ति और आगे की रणनीति इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई पर सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंग्मो ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सफदरजंग अस्पताल प्रशासन को आधिकारिक रूप से पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि उनकी सहमति के बिना वांगचुक का कोई भी इलाज शुरू न किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने वांगचुक को किसी अन्य अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग भी रखी है। दूसरी तरफ, वांगचुक को हटाए जाने के बाद जंतर-मंतर पर आंदोलन थमा नहीं है। उनके समर्थकों और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसी जगह पर मोर्चा संभाल लिया है और भूख हड़ताल को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू हुआ यह अनशन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार इसे स्वास्थ्य चिंताओं के तहत उठाया गया कदम बता रही है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे आवाज़ दबाने की कोशिश करार दे रहे हैं। अब देखना यह है कि अस्पताल के बिस्तर से वांगचुक का यह आंदोलन आगे क्या दिशा तय करता है। Post navigation अयातुल्ला अली खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार: ईरान में भारत का सर्वधर्म संदेश