नंदीग्राम में इस बार चुनाव के दौरान माहौल काफी शांत है। पहले यह इलाका राजनीति के बड़े संघर्ष के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहां ज्यादा हलचल नहीं दिख रही है। पिछले चुनाव में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था, जो काफी चर्चा में रहा। इस बार तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी की जगह शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ उनके करीबी नेता को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने एक नया दांव खेला है, लेकिन अभी तक स्थिति शुभेंदु अधिकारी के पक्ष में मजबूत दिख रही है। फिलहाल यहां चुनावी माहौल शांत है और ज्यादा उत्साह नजर नहीं आ रहा है। साख और प्रभाव की टक्कर 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े दिखाते हैं कि भाजपा को करीब 6 हजार वोटों की बढ़त मिली थी। इससे साफ है कि शुभेंदु अधिकारी की पकड़ अब भी मजबूत है। तामलुक लोकसभा क्षेत्र की सातों सीटों, जिसमें नंदीग्राम भी शामिल है, में भाजपा आगे रही थी। इस बार पवित्र कर मैदान में हैं, जो पहले शुभेंदु के करीबी माने जाते थे और हिंदू संगठनों से जुड़े रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस को उम्मीद है कि पवित्र कर कुछ हिंदू वोट अपनी ओर खींच सकते हैं। साथ ही पार्टी को भरोसा है कि मुस्लिम वोट उनके साथ रहेंगे। अगर ऐसा हुआ तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। रणनीति बदली, इस बार मैदान में नहीं उतरा बड़ा चेहरा नंदीग्राम में इस बार चुनाव का माहौल बदला हुआ है। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का कोई बड़ा नेता या मंत्री सीधे शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ मैदान में नहीं उतरा है। इस बार पार्टी ने “इनसाइड रणनीति” अपनाई है और पवित्र कर को उम्मीदवार बनाया है। पवित्र कर पहले शुभेंदु अधिकारी के करीबी रहे हैं और उनके चुनावी कामकाज को संभालते थे। इसलिए टीएमसी को उम्मीद है कि वह पुराने नेटवर्क और संपर्क का फायदा उठा सकते हैं। पार्टी का मानना है कि इससे शुभेंदु के वोट बैंक में सेंध लग सकती है। अब देखना होगा कि यह रणनीति कितनी सफल होती है। बड़ा सवाल: क्या जिले में फीका पड़ेगा दीदी का असर पिछली बार ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम में मौजूद थीं, जिससे कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह था और शुभेंदु अधिकारी को इलाके में ही रहकर चुनाव लड़ना पड़ा था। लेकिन इस बार स्थिति अलग है। ममता न तो यहां हैं और न ही टीएमसी का कोई बड़ा नेता मैदान में है। दूसरी तरफ शुभेंदु अधिकारी काफी सक्रिय हैं। वे सिर्फ नंदीग्राम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ममता की सुरक्षित सीट भवानीपुर में जाकर उन्हें चुनौती दे रहे हैं। इससे पूरे पूर्वी मिदनापुर जिले में उनका प्रभाव और मजबूत दिख रहा है, जबकि टीएमसी की पकड़ कमजोर लग रही है। संदेह और भरोसे की जंग ममता बनर्जी के उम्मीदवार पवित्र कर को लेकर नंदीग्राम में सवाल उठ रहे हैं। लोग चर्चा कर रहे हैं कि क्या वह सच में शुभेंदु अधिकारी को हराने आए हैं या नहीं। इलाके में तृणमूल कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच इसको लेकर शक बना हुआ है। यहां तक कि एक मजाक भी चल रहा है कि पवित्र कर दिन में टीएमसी और रात में शुभेंदु के संपर्क में रहते हैं। इस तरह की बातों से उनकी विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है और ममता की रणनीति कमजोर दिख रही है। हालांकि पवित्र कर खुद को पूरी तरह ममता का समर्थक बता रहे हैं। Post navigation बंगाल चुनाव: मुर्शिदाबाद की सीटों पर नई राजनीतिक हलचल