भारत में डिजिटल क्रांति के साथ सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी अकाउंट और साइबर अपराधों के मामले भी बढ़े हैं। अब इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर KYC (Know Your Customer) को अनिवार्य करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। एक संसदीय समिति ने इस संबंध में अहम सिफारिशें दी हैं, जिनका उद्देश्य डिजिटल स्पेस को अधिक सुरक्षित बनाना है। सोशल मीडिया के लिए KYC अनिवार्य करने की सिफारिश संसदीय समिति ने आईटी और गृह मंत्रालय को सुझाव दिया है कि सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर KYC आधारित पहचान प्रणाली लागू की जाए। इस कदम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करना है। यदि यह लागू होता है, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पहचान की पारदर्शिता बढ़ेगी। अकाउंट बनाने से पहले जरूरी होगा वेरिफिकेशन नए नियम लागू होने के बाद यूजर्स को किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने या लॉगिन करने से पहले KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यानी अब यूजर्स की पहचान पूरी तरह गुमनाम नहीं रह पाएगी और हर अकाउंट किसी वास्तविक व्यक्ति से जुड़ा होगा। इससे ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी आसान हो जाएगी। फर्जी अकाउंट्स पर लगेगी लगाम समिति की रिपोर्ट के मुताबिक फर्जी प्रोफाइल आज के समय में सबसे बड़ी समस्या बन चुके हैं। इनका इस्तेमाल साइबर स्टॉकिंग, धोखाधड़ी, उत्पीड़न और पहचान चोरी जैसे अपराधों में किया जाता है। खासकर महिलाएं और बच्चे इनका सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। KYC लागू होने से ऐसे फर्जी अकाउंट्स बनाना मुश्किल हो जाएगा और अपराधों में कमी आ सकती है। उम्र की सख्त जांच और नियमों का पालन रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स की उम्र का सही वेरिफिकेशन करने पर भी जोर दिया गया है। खासकर डेटिंग और गेमिंग ऐप्स पर नाबालिगों की पहुंच को रोकने के लिए समय-समय पर उम्र की दोबारा जांच की सिफारिश की गई है। साथ ही, नियमों का पालन न करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। AI और नई तकनीकों से बढ़ता खतरा समिति ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से ऑनलाइन खतरे और बढ़ गए हैं। डीपफेक वीडियो, फर्जी कंटेंट और ऑटोमेटेड बॉट्स के जरिए गलत जानकारी तेजी से फैल रही है। ऐसे में सख्त नियमों और बेहतर निगरानी की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है। प्राइवेसी बनाम सुरक्षा की चुनौती हालांकि KYC आधारित सिस्टम से सुरक्षा मजबूत हो सकती है, लेकिन इससे यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। निजी डेटा की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा छोटे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए इस तरह की व्यवस्था लागू करना तकनीकी और आर्थिक रूप से मुश्किल हो सकता है। डिजिटल दुनिया में बड़ा बदलाव संभव यदि सरकार इन सिफारिशों को लागू करती है, तो भारत की डिजिटल दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। गुमनाम अकाउंट्स की जगह वेरिफाइड पहचान का चलन बढ़ेगा, जिससे ऑनलाइन स्पेस अधिक सुरक्षित तो होगा, लेकिन यूजर्स की गुमनामी कम हो जाएगी। Post navigation अब पूरा परिवार रहेगा सुरक्षित! Truecaller का नया Family Protection फीचर लॉन्च अब खुद मैसेज लिखेगा WhatsApp! AI फीचर से चैटिंग होगी सुपर आसान, जानिए कैसे करेगा काम