पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान ने बड़ा मानवीय कदम उठाया है। ईरान सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य से आवश्यक और मानवीय सहायता सामग्री ले जाने वाले जहाजों को अपने बंदरगाहों तक पहुंचने की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरा क्षेत्र संघर्ष और आपूर्ति संकट से जूझ रहा है। ईरानी कृषि उप मंत्री हूमन फाथी द्वारा पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (PMO) को लिखे पत्र के अनुसार, सरकार और सशस्त्र बलों ने खाद्यान्न और पशुधन ले जाने वाले जहाजों को विशेष अनुमति देने पर सहमति जताई है। इस कदम को वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को राहत देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। युद्ध के असर से होर्मुज में फंसे हजारों नाविक 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा तेहरान पर हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्त नियंत्रण कर लिया था। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, जहां पहले इस मार्ग से रोजाना करीब 130 जहाज गुजरते थे, वहीं अब करीब 2,000 जहाजों पर लगभग 20,000 नाविक फंसे हुए हैं। इस स्थिति ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर डाला है। महंगाई और सप्लाई संकट से दुनिया परेशान होर्मुज संकट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। यूरोप और अमेरिका में भी हालात खराब हैं। जर्मनी में पेट्रोल की कीमतें दिन में कई बार बदल रही हैं, जबकि फ्रांस के 16% फ्यूल स्टेशनों पर आपूर्ति संकट बना हुआ है। अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने चेतावनी दी है कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ेगा। हालांकि, ईरान का यह कदम जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने और वैश्विक संकट को कुछ हद तक कम करने की उम्मीद जगाता है। Post navigation यूपी में ISIS नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, यूपी ATS और दिल्ली पुलिस का जॉइंट ऑपरेशन सफल भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर अब ‘नेचुरल सिक्योरिटी’! सांप और मगरमच्छ करेंगे निगरानी