पंडित प्रदीप मिश्रा : शिव की शरण में रहने वाला हर व्यक्ति हो जाता है भक्तिमयपंडित प्रदीप मिश्रा : शिव की शरण में रहने वाला हर व्यक्ति हो जाता है भक्तिमय

बांसडीहरोड। बाबा बालखंडी नाथ धाम में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के संरक्षण में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को शरणागति, सत्संग और शिव परिवार के आदर्शों का महत्व बताया। उन्होंने अपने प्रवचन में भगवान शिव की कृपा, भक्तों के कल्याण और धार्मिक जीवन के मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

गुरु और शिव की शरण से संवरता है जीवन : पंडित प्रदीप मिश्रा

श्री शिव महापुराण कथा शुरू होने से पहले परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, उनकी माता तेतरी देवी, भाई धर्मेंद्र सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों ने व्यासपीठ की पूजा कर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का स्वागत किया। कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने कहा कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता, गुरु और भगवान शिव का सम्मान करता है और उनकी शरण में रहता है, उसके जीवन में सुख, शांति और खुशियां आती हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे विचार और भक्ति से जीवन बेहतर बनता है। भगवान शिव की कृपा से व्यक्ति को सही मार्ग मिलता है और उसका जीवन आनंद से भर जाता है।

उन्होंने मछली और पानी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे मछली पानी के बिना जीवित नहीं रह सकती, वैसे ही मनुष्य भी ईश्वर की भक्ति और अच्छे संस्कारों के सहारे ही अपने जीवन को सफल बना सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति समर्पण व्यक्ति को सही राह दिखाता है और उसके जीवन को नई दिशा देता है।

कथावाचक ने कहा कि व्यक्ति का व्यक्तित्व और सम्मान उसकी संगति से प्रभावित होता है। अच्छी संगति जीवन में अच्छे संस्कार और सकारात्मक सोच लाती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भगवान शिव की भक्ति और उनके आदर्शों को अपनाता है, उसके जीवन में सुखद बदलाव आने लगते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अच्छे विचारों, सत्संग और सदाचार को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है शिव परिवार : पंडित प्रदीप मिश्रा

महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि द्रौपदी हर समय भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करती थीं। उनकी सच्ची पुकार सुनकर भगवान उनकी रक्षा के लिए स्वयं प्रकट हुए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का नाम लेता है, उसकी सहायता के लिए ईश्वर हमेशा तत्पर रहते हैं।

माता पार्वती के बचपन का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनका मन भगवान शिव की भक्ति में लगा रहता था। वे पार्थिव शिवलिंग बनाकर नियमित रूप से उनकी पूजा-अर्चना करती थीं। पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव का परिवार प्रेम, त्याग, समर्पण और आपसी सद्भाव का प्रतीक है। शिव परिवार समाज को एकजुटता, सहनशीलता और पारिवारिक संस्कारों की सीख देता है। कथा के दौरान पूरा पंडाल “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए।

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