धुरंधर 2: द रिवेंज इन दिनों सिनेमाघरों में धूम मचा रही है। रणवीर सिंह की इस फिल्म ने रिलीज के महज 5 दिनों में वर्ल्डवाइड 800 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है। फिल्म में दिखाए गए माफिया किरदार और उसके पाकिस्तान कनेक्शन को लेकर काफी चर्चा हो रही है। इसी बीच अतीक अहमद को लेकर प्रयागराज के पूर्व आईजी सूर्य कुमार ने कई पुराने और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।अतीक अहमद और दंगे का कनेक्शनपूर्व आईजी सूर्य कुमार के मुताबिक, साल 1986 में जब उनकी तैनाती इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में थी, तब वहां एक बड़ा दंगा हुआ था। बाद में जांच के दौरान पता चला कि इस दंगे के पीछे अतीक अहमद का हाथ था। पुलिस ने जब सख्ती दिखाई और उसके घर पर छापेमारी की, तो वह शहर छोड़कर मुंबई भाग गया। कुछ समय तक वह वहीं छिपा रहा और फिर धीरे-धीरे उसने अपने आप को एक बड़े माफिया सरगना के रूप में स्थापित कर लिया।जमीन कब्जा और अपराध का विस्तारसूर्य कुमार ने बताया कि अतीक अहमद विवादित जमीनों को सस्ते दामों में खरीदकर भारी मुनाफा कमाता था। जो लोग उसका विरोध करते थे, उन्हें वह डराता-धमकाता या फिर गंभीर अंजाम भुगतने पर मजबूर कर देता था। उसने प्रयागराज में एक बंगाली परिवार की कोठी पर भी कब्जा कर लिया था। इस मामले में उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। यहां तक कि एक पुलिसकर्मी के साथ भी बर्बरता की गई, जब वह समन देने गया था।नकली नोट और पाकिस्तान कनेक्शनपूर्व आईजी ने यह भी खुलासा किया कि अतीक अहमद का संबंध नकली भारतीय मुद्रा के बड़े नेटवर्क से था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े लोग नकली नोट छापकर उन्हें काठमांडू स्थित पाकिस्तानी दूतावास भेजते थे। इसके बाद ये नोट नेपाल के रास्ते भारत में लाए जाते थे। इस नेटवर्क में शहाबुद्दीन और मुख्तार अंसारी जैसे बड़े नाम भी शामिल थे, जो अलग-अलग इलाकों में इस नेटवर्क को संभालते थे।राजनीति, हत्याएं और गिरावटसूर्य कुमार के अनुसार, जब पुलिस का दबाव बढ़ा तो अतीक अहमद ने राजनीति का सहारा लिया। उसे समाजवादी पार्टी से टिकट मिला और बाद में वह अन्य दलों से भी जुड़ा। अपने दबदबे को बनाए रखने के लिए उसने राजू पाल की हत्या करवाई, ताकि वह चुनाव निर्विरोध जीत सके। इसके बाद इस केस के गवाह उमेश पाल की भी हत्या कर दी गई।समय के साथ जब प्रशासन सख्त हुआ और सरकार का समर्थन मिला, तो अतीक अहमद का साम्राज्य कमजोर पड़ने लगा। उसकी संपत्तियां जब्त की गईं और उसका गैंग भी टूट गया। जिन लोगों को वह सालों तक डराता था, वही लोग उसके खिलाफ खड़े होने लगे। इस तरह धीरे-धीरे उसके अपराध के साम्राज्य का अंत हो गया। #WATCH | Lucknow, UP: On the reign of gangster Atiq Ahmed, Former IG (Prayagraj) Surya Kumar says, "In 1986, I was deployed in Allahabad. There was a riot... and I later came to know that Atiq was the one who started it. When the police became strict, we searched Atiq Ahmed’s… pic.twitter.com/khgl16rz6n— ANI (@ANI) March 24, 2026 Post navigation दुनिया पर मंडराया ‘एनर्जी लॉकडाउन’ का साया, भारत कितना सुरक्षित? केरल में प्रचार करेंगे माणिक साहा; बंगाल में स्वतंत्र वोटिंग पर जोर