पश्चिम बंगाल में बेहतर प्रदर्शन से उत्साहित भाजपा अब पंजाब में भी संगठन मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी राज्य में अपनी पकड़ बढ़ाने के लिए बंगाल जैसी रणनीति अपनाने वाली है। इसके तहत जून में पंजाब की सभी विधानसभा सीटों और तीनों क्षेत्रों—माझा, दोआबा और मालवा—के लिए प्रभारियों की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही गृह मंत्री अमित शाह भी जल्द पंजाब का दौरा कर संगठन को सक्रिय करने की कोशिश करेंगे। भाजपा पंजाब में नशे और सुरक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है। पार्टी का मानना है कि जैसे बंगाल में घुसपैठ बड़ा मुद्दा था, वैसे ही पंजाब में पाकिस्तान से आने वाली ड्रग्स बड़ी चुनौती बन चुकी है। भाजपा का आरोप है कि नशा खत्म करने का वादा करने वाली आम आदमी पार्टी इस मामले में सफल नहीं रही। ऐसे में पार्टी पूरे राज्य में नशे के खिलाफ अभियान और यात्राएं निकालने की योजना बना रही है। शून्य सीटों के बाद भी बीजेपी को पंजाब में उम्मीद पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कई बड़े नेता जैसे सुनील जाखड़, कैप्टन अमरिंदर सिंह और रवनीत सिंह बिट्टू के बीजेपी में शामिल होने के बावजूद पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। हालांकि बीजेपी को 18.56 प्रतिशत वोट मिले, जो काफी अच्छा प्रदर्शन था। यह कांग्रेस की सात और आप की तीन सीटों से कम वोट शेयर था। पार्टी का कहना है कि इस बार उसे उम्मीद है कि सिद्धू परिवार और हरभजन सिंह जैसे मजबूत सिख चेहरे जुड़ने से स्थिति बदलेगी। इससे जमीनी स्तर पर बेहतर संगठन और प्रबंधन के जरिए परिणाम सुधारने की कोशिश की जाएगी। शिअद से गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार पार्टी सार्वजनिक रूप से अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ गठबंधन से इनकार कर रही है, लेकिन अंदरूनी तौर पर उसकी योजना अपनी शर्तों पर गठबंधन करने की है। राज्य इकाई के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत शिअद से ज्यादा रहा था। इसी आधार पर पार्टी चाहती है कि अगर शिअद बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो, तभी गठबंधन पर बातचीत आगे बढ़ सकती है। फिलहाल दोनों दलों के बीच समझौते को लेकर स्थिति साफ नहीं है और बातचीत की संभावना शर्तों पर निर्भर है। बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू राज्य में मान सरकार के कई मंत्री भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। इनमें से कुछ मंत्रियों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बाकी आरोपों वाले मंत्रियों पर भी जल्द बड़ी कार्रवाई की संभावना है। पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि राज्यसभा के सात सदस्यों के आम आदमी पार्टी छोड़ने और सोमवार को मुख्यमंत्री मान के भाई के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी के टूटने की धारणा और मजबूत हुई है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि आम आदमी पार्टी में आंतरिक संकट और अस्थिरता बढ़ रही है। Post navigation प्रधानमंत्री मोदी पर विवादित बयान पड़ा भारी, सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी पर मुकदमा फ्लोर टेस्ट में विजय की बड़ी जीत, 144 वोट मिले; AIADMK के 24 विधायकों ने भी किया समर्थन