होर्मुज में ढील: जरूरी सामान वाले जहाजों के लिए ईरान ने खोला रास्ता

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज से अब तक कम से कम आठ भारतीय जहाज सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं। पहले सात जहाज निकल चुके थे, जबकि शनिवार को ‘ग्रीन सान्वी’ नाम का एक और जहाज भी इस जलडमरूमध्य को पार कर गया।

एजेंसियों के मुताबिक, इस क्षेत्र में अभी भी करीब 300 जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या चीन के टैंकरों (करीब 60-70) की बताई जा रही है। इसके मुकाबले ईरान के सहयोग से भारतीय जहाजों का सुरक्षित निकलना भारत की रणनीतिक मजबूती को दर्शाता है।

एलपीजी आपूर्ति को मिला बड़ा सहारा

इन जहाजों के सुरक्षित पहुंचने से भारत में एलपीजी आपूर्ति को बड़ा सहारा मिला है। पश्चिम एशिया संकट के चलते देश एलपीजी की कमी के मुहाने पर था, लेकिन इन शिपमेंट्स से स्थिति में सुधार आया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शिवालिक, नंदा देवी, पाइन गैस, जग वसंत, बीडब्ल्यू टायर, बीडब्ल्यू एल्म, जग लाडकी और ग्रीन सान्वी जैसे जहाजों के जरिए कुल मिलाकर करीब 2.79 लाख टन एलपीजी भारत पहुंची है। यह देश की लगभग 2-3 दिन की जरूरत के बराबर है। इसके अलावा ‘जग लाडकी’ जहाज से 80 हजार टन से ज्यादा कच्चा तेल भी मुंद्रा पोर्ट पहुंचा है।

मुंद्रा, कांडला, मुंबई और न्यू मंगलौर जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर यह सप्लाई पहुंची है, जिससे वाणिज्यिक सेक्टर को विशेष राहत मिली है।

चीन-पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें

जहां भारत अपने जहाज निकालने में सफल रहा है, वहीं चीन और पाकिस्तान को अब भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चीन ने हाल ही में बताया कि उसके केवल तीन कंटेनर ही अब तक होर्मुज से बाहर निकल पाए हैं, जबकि दर्जनों टैंकर अब भी फंसे हुए हैं।

पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके 20 जहाजों को ईरान से अनुमति मिली है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल सिर्फ दो पाकिस्तानी जहाज ही कराची पहुंच पाए हैं।

इस बीच ओमान तट के सहारे वैकल्पिक रूट अपनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं, जिससे आने वाले दिनों में और जहाजों को सुरक्षित निकालने की उम्मीद जताई जा रही है। कुल मिलाकर, इस संकट के बीच भारत का समुद्री प्रबंधन और रणनीतिक समन्वय उसकी बढ़ती वैश्विक क्षमता को उजागर करता है।

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