Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी आज, इन नियमों का पालन करने से मिलेगा विशेष फलNirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी आज, इन नियमों का पालन करने से मिलेगा विशेष फल

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को लेकर महिलाओं और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इस वर्ष यह व्रत शुभ संयोग में पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्रा के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:12 बजे शुरू हुई थी और 25 जून की रात 8:09 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत और पूजा करने से श्रद्धालुओं को वर्ष भर की 24 एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं।

निर्जला एकादशी व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन व्रत पारण तक पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती। हालांकि, ज्योतिषाचार्य ने सलाह दी है कि मधुमेह, गंभीर बीमारी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही व्रत रखना चाहिए और आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

परिवार की खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है यह व्रत

ज्योतिषाचार्य डॉ. पूनम वार्ष्णेय के अनुसार, सनातन परंपरा में निर्जला एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसे कई स्थानों पर सैनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा और उपासना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी पर किए गए दान-पुण्य का विशेष फल प्राप्त होता है। खासकर गर्मी के मौसम में लोगों को राहत पहुंचाने वाली वस्तुओं जैसे मिट्टी के घड़े, हाथ के पंखे, रसीले फल और शरबत आदि का दान करना अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना जाता है।

निर्जला एकादशी को लेकर भक्तों में गहरी श्रद्धा

भावना एस्टेट की रहने वाली राखी ने बताया कि निर्जला एकादशी का व्रत उनके लिए आस्था और विश्वास का पर्व है। उन्होंने कहा कि गर्मी अधिक होने के बावजूद श्रद्धा के कारण यह व्रत कठिन नहीं लगता। भगवान विष्णु और ठाकुरजी की कृपा से बिना पानी के भी पूरा दिन व्रत रखना संभव हो जाता है। राखी के अनुसार, वह अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। उनका मानना है कि निर्जला एकादशी का व्रत परिवार में खुशहाली और अखंड सौभाग्य का प्रतीक है और इसे पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करना चाहिए।

एक व्रत, कई गुना पुण्य फल का विश्वास

दयालबाग निवासी कांति देवी ने बताया कि निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और विशेष फल देने वाले व्रतों में माना जाता है। उनके अनुसार, इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ दान-पुण्य का भी खास महत्व होता है। खासकर मिट्टी के घड़े, फल और जरूरतमंदों के लिए उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। कांति देवी ने कहा कि वे अपनी सखियों के साथ मिलकर इस पर्व की तैयारियों में जुटी हैं और पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा की तैयारी कर रही हैं।

निर्जला एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये काम

* व्रत के दिन तामसिक और मांसाहारी भोजन से परहेज करें।
* गुस्से, बहस और किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहें।
* निर्जला एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचें।
* आलस्य और जरूरत से ज्यादा सोने से परहेज करें तथा पूजा-पाठ और भक्ति में समय दें।
* किसी का अनादर या अपमान न करें और सभी के प्रति विनम्र व्यवहार रखें।

निर्जला एकादशी पर किन वस्तुओं का दान माना जाता है शुभ?

* पानी से भरा मिट्टी का घड़ा या मटका दान करें।
* खरबूजा, तरबूज, आम जैसे मौसमी और रसीले फलों का दान शुभ माना जाता है।
* गर्मी से राहत देने के लिए हाथ का पंखा या छाता दान किया जा सकता है।
* सत्तू, चने की दाल और अन्य खाद्य सामग्री का दान भी पुण्यदायी माना जाता है।

निर्जला एकादशी पर करें इन मंत्रों का जाप

ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।
यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्, विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् , वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

निर्जला एकादशी पूजा में भगवान विष्णु को क्या अर्पित करना शुभ माना जाता है?

* निर्जला एकादशी की पूजा में भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
* श्रीहरि को पीले रंग के फूल चढ़ाए जाते हैं, जो सुख, समृद्धि और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं।
* चंदन का तिलक लगाकर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
* अक्षत (चावल) अर्पित कर परिवार की सुख-शांति और मंगल की कामना की जाती है।
* पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करना धार्मिक दृष्टि से पुण्यकारी माना जाता है।
* पूजा में मौसमी फल और नैवेद्य अर्पित कर भगवान को भोग लगाया जाता है।
* आराधना के दौरान घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु की पूजा और स्तुति की जाती है।

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