बलिया: जिले की सभी छह तहसीलों में निजी अस्पतालों के खिलाफ जांच जारी है। अब तक करीब 60 से अधिक निजी अस्पताल और 34 जांच केंद्र मानकों पर खरे नहीं पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी को नोटिस भेजा है। नोटिस का तीन दिन में जवाब न देने पर सील या कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रजिस्टर्ड निजी अस्पताल, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड केंद्र भी जांच में मानकों के अनुसार नहीं पाए गए। विभाग ने पिछले एक महीने में छह निजी अस्पताल सील किए हैं और पांच चिकित्सकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। दो चिकित्सक, पूर्वाचल अस्पताल के डॉ. आदित्य सिंह और आकाश अस्पताल के डॉ. हेमंत सिंह गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं। अपूर्वा अस्पताल में लापरवाही से मौत के मामले में चिकित्सक गिरफ्तारी की मांग, जांच के लिए टीम का गठन अपूर्वा अस्पताल में ऑपरेशन में लापरवाही से अनीशा की मौत के मामले में आरोपी चिकित्सक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर परिजन और छात्र नेता विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जिले में चिकित्सकों की लापरवाही के कारण निजी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामलों में बढ़ोतरी होने पर कमिश्नर विवेक कुमार ने 17 मार्च को डीएम को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने तहसील स्तर पर एसडीएम, सीओ, सीएचसी अधीक्षक और आयुर्वेद व होम्योपैथी विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में संयुक्त टीम का गठन किया, जो नर्सिंग होम और जांच केंद्रों के पंजीकरण की वैधता जांचेगी। जांच में मिले अनियमित अस्पतालों को नोटिस, तीन अस्पताल सील प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अस्पतालों की जांच की गई। जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं, जिनका विवरण तैयार करने के बाद सभी को नोटिस भेजा गया। भारी अनियमितताएं पाए जाने पर तीन अस्पतालों को सील भी किया गया। इस मामले में एसीएमओ और नोडल निजी अस्पताल प्रभारी डॉ. योगेन्द्र दास ने बताया कि डीएम के आदेश पर चलाए गए जांच अभियान में सभी तहसीलों में मानक नहीं मानने वाले निजी अस्पताल और जांच केंद्र संचालकों को उनकी कमियों की सूची बनाकर नोटिस दिया गया है। तय समय में जवाब न मिलने पर आगे कार्रवाई की जाएगी। Post navigation दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे : 1 अप्रैल से टोल बढ़ा, सफर होगा महंगा आज से बदल गए ये बड़े नियम! PAN, FASTag, LPG से रेलवे तक सब पर असर