क्यों अब तक कुंवारे हैं Suvendu Adhikari? परिवार और पर्सनल लाइफ का बड़ा खुलासा

Suvendu Adhikari : पश्चिम बंगाल की राजनीति के कद्दावर नेता Suvendu Adhikari ने शादी न करने का फैसला सोच-समझकर लिया। उन्होंने खुद एक बार बताया था कि उनका राजनीतिक सफर 1987 में छात्र राजनीति से शुरू हुआ और धीरे-धीरे वे पूरी तरह सार्वजनिक जीवन में समर्पित हो गए। उनके अनुसार, इलाके के तीन प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी—सतीश सामंत, सुशील धारा और अजय मुखर्जी—का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। ये सभी अविवाहित रहकर समाज सेवा में लगे रहे। उसी प्रेरणा से सुवेंदु अधिकारी ने भी निजी जीवन की बजाय जनसेवा को प्राथमिकता दी और शादी न करने का निर्णय लिया।

ममता बनर्जी से समानता, लेकिन राजनीति में टकराव

दिलचस्प बात यह है कि Suvendu Adhikari और Mamata Banerjee के बीच भले ही आज तीखा राजनीतिक संघर्ष हो, लेकिन निजी जीवन में दोनों की राह एक जैसी है। दोनों ही नेताओं ने शादी नहीं की और खुद को पूरी तरह राजनीति व समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। कभी ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले सुवेंदु अधिकारी आज उनके सबसे बड़े राजनीतिक विरोधियों में गिने जाते हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर दोनों के बीच सीधा मुकाबला हुआ, जिसमें सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर देते हुए हराया और राष्ट्रीय राजनीति में सुर्खियां बटोरीं।

परिवार का मजबूत राजनीतिक बैकग्राउंड

सुवेंदु अधिकारी का परिवार पश्चिम बंगाल की राजनीति में खासा प्रभाव रखता है। उनके पिता शिशिर कुमार अधिकारी लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहे और केंद्र सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। उनके भाई—दिब्येंदु अधिकारी और सौमेंदु अधिकारी—भी राजनीति में सक्रिय हैं। पूर्वी मेदिनीपुर जिले में अधिकारी परिवार की मजबूत पकड़ साफ नजर आती है।

15 दिसंबर 1970 को कांथी (Contai) में जन्मे सुवेंदु अधिकारी ने छात्र राजनीति से शुरुआत कर तेजी से अपनी पहचान बनाई। वे पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े और 2009 में सांसद बने। 2007 के नंदीग्राम आंदोलन ने उन्हें राज्य स्तर पर बड़ी पहचान दिलाई। बाद में 2020 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक प्रमुख विपक्षी चेहरे के रूप में स्थापित हैं।

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