कालीघाट की तंग गलियों में मां भवानी के जयकारों और धूप-अगरबत्ती की खुशबू के बीच एक साधारण सा घर है। यही घर बंगाल की राजनीति का अहम केंद्र माना जाता है। पहले इसकी सादगी की खूब चर्चा होती थी, लेकिन अब यहां राजनीति का शोर ज्यादा है। मुकाबला है ममता बनर्जी की छवि और शुभेंदु अधिकारी की रणनीति का। 2011 में ममता बेहद साधारण जीवन के साथ सत्ता में आई थीं। आज भी वह वहीं रहती हैं, लेकिन अब उनके आसपास विवाद बढ़ गए हैं। उनके पुराने घर के साथ-साथ भतीजे अभिषेक बनर्जी के बड़े घर को लेकर भी विपक्ष सवाल उठा रहा है। ममता का भवानीपुर से गहरा रिश्ता है। यह सीट उनकी राजनीति की मजबूत जगह रही है। वह यहां कई बार विधायक और सांसद रह चुकी हैं, इसलिए लोगों से उनका पुराना जुड़ाव है। ममता का जनसंपर्क बनाम शुभेंदु का सियासी गणित: किसकी चलेगी चाल? ममता की सबसे बड़ी ताकत लोगों से उनका सीधा जुड़ाव है, लेकिन शुभेंदु आंकड़ों और रणनीति पर भरोसा कर रहे हैं। 2021 के उपचुनाव में ममता ने बड़ी जीत हासिल की थी। मगर 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी इलाके में उनकी बढ़त काफी कम हो गई। इसके बाद मतदाता सूची में बदलाव हुआ और करीब 60 हजार नाम हटा दिए गए, जिससे कुल वोटर संख्या भी घट गई। ममता ने इसे गलत बताते हुए नाराजगी जताई और सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। दूसरी ओर, शुभेंदु इसी आंकड़ों के आधार पर दावा कर रहे हैं कि वह ममता को बड़े अंतर से हरा सकते हैं। भवानीपुर में नंदीग्राम जैसा दांव: भाजपा की घेराबंदी, ममता का रात का जनसंवाद 2021 में ममता बनर्जी नंदीग्राम जाकर शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देने गई थीं। इस बार भाजपा ने वही तरीका अपनाया है। शुभेंदु खुद भवानीपुर में चुनाव लड़ते हुए जोरदार प्रचार कर रहे हैं। वह दिनभर अलग-अलग लोगों से मिल रहे हैं और खासकर पढ़े-लिखे और व्यापारी वर्ग को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने से भी भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है। वहीं, इलाके के अमीर और कारोबारी लोगों में इस बार बदलाव की चर्चा ज्यादा हो रही है। कुछ लोग रोजगार और बंद पड़े उद्योगों को बड़ा मुद्दा मान रहे हैं। हालांकि, वे खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं, लेकिन उनके संकेत बदलाव की ओर हैं। दूसरी तरफ, ममता का तरीका अलग है। वह बड़े मंचों के बजाय रात में गलियों में जाकर लोगों से सीधे बात कर रही हैं। वह लोगों को भरोसा दिला रही हैं कि उनकी सरकार फिर आएगी और इसी संदेश से मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं। केमेस्ट्री बनाम गणित: किसका चलेगा दांव? भवानीपुर की चुनावी लड़ाई अब एक बड़े सवाल पर आ गई है। क्या ममता का लोगों से मजबूत जुड़ाव और भरोसा इन बदले हुए आंकड़ों पर भारी पड़ेगा? या फिर कम हुए वोटर और घटती बढ़त का असर इस बार नतीजे बदल देगा? पहले यह सीट आसान मानी जाती थी, लेकिन अब यह बहुत अहम मुकाबला बन गई है। पूरे देश की नजर इस पर है। सब जानना चाहते हैं कि इस बार जीत किसकी होगी। अब देखना है कि जनता किसे चुनती है और किसके पक्ष में फैसला जाता है। Post navigation Data Over Dynasties”: Grok के जवाब ने बढ़ाई बहस, Narendra Modi vs Rahul Gandhi चर्चा में TMC सांसद मिताली बाग पर हमला! BJP पर गुंडागर्दी का बड़ा आरोप