समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी की ब्राह्मण समाज पर कथित अपमानजनक टिप्पणी के बाद पार्टी में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। भाटी के माफी मांगने के बावजूद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। गौतमबुद्ध नगर में पार्टी को बड़ा झटका तब लगा, जब जिला बार एसोसिएशन के निर्वाचित अध्यक्ष और सचिव समेत सैकड़ों अधिवक्ताओं ने समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने छोड़ी पार्टी जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन, गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष Manoj Bhati और सचिव Shobharam Chandila ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने इस्तीफे की घोषणा की। मनोज भाटी ने समाजवादी पार्टी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय सचिव पद से भी त्यागपत्र दे दिया। वहीं शोभाराम चंदीला, जो पिछले 13 वर्षों से पार्टी से जुड़े थे, उन्होंने भी पार्टी से नाता तोड़ लिया। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ नेताओं के बयान समाज में विघटनकारी मानसिकता पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज हमेशा समावेशी सोच का समर्थन करता है, लेकिन हाल के बयानों ने माहौल को खराब किया है। उनके साथ ही सैकड़ों अधिवक्ताओं ने भी पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। ब्राह्मण समाज में भारी नाराजगी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि बार में करीब 700 अधिवक्ता ब्राह्मण समाज से आते हैं और राजकुमार भाटी की टिप्पणी से उनमें भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह बयान केवल ब्राह्मण समाज ही नहीं, बल्कि सनातन बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को भी आहत करता है। मनोज भाटी ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित बयान बेहद असंवेदनशील और अभद्र था, जिसके कारण अधिवक्ताओं और सामाजिक संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी से जुड़े कुछ अधिवक्ता और पदाधिकारी 600 वकीलों के लिए बनाए जा रहे चैंबरों के निर्माण कार्य को रुकवाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे अधिवक्ता समाज में असंतोष और बढ़ गया है। बीजेपी ने भी साधा निशाना इस पूरे विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने भी समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता Radhika Khera ने कहा कि राजकुमार भाटी का बयान समाजवादी पार्टी के हिंदू और ब्राह्मण विरोधी सोच को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां समाज में नफरत फैलाने वाली हैं और जनता इसका जवाब राजनीतिक रूप से देगी। राधिका खेरा ने कहा कि जिस समाज के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया है, उसका आक्रोश समाजवादी पार्टी के राजनीतिक भविष्य पर भारी पड़ सकता है। उन्होंने सपा नेतृत्व से इस मामले पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग भी की। सपा नेतृत्व की चुप्पी पर उठे सवाल विवाद लगातार बढ़ने के बावजूद समाजवादी पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी की चुप्पी को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर जल्द ही पार्टी नेतृत्व ने स्थिति संभालने की कोशिश नहीं की, तो इसका असर संगठन और आगामी चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। गौतमबुद्ध नगर में हुए इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि राजकुमार भाटी की टिप्पणी ने समाजवादी पार्टी के भीतर असंतोष की बड़ी लहर पैदा कर दी है, जिसका असर आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है। Post navigation वीडी सतीशन होंगे केरल के अगले मुख्यमंत्री, कांग्रेस ने नाम पर लगाई मुहर Xi Jinping की ‘Declining Nation’ टिप्पणी पर Donald Trump का जवाब, बोले- Biden कार्यकाल की बात कर रहे थे